Babarnama
— Munshi Deviprasad —
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गीता प्रेस गोरखपुर विश्व की एक प्रतिष्ठित और अग्रणी धार्मिक संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष १९२३ में सनातन धर्म, संस्कृति और वेदों-पुराणों के प्रचार-प्रसार के लिए की गई थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य बिना किसी लाभ के कम कीमत पर धार्मिक पुस्तकों को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे समाज में नैतिक व आध्यात्मिक चेतना जागृत हो सके। अपनी स्थापना से लेकर अब तक, गीता प्रेस ने रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों के प्रामाणिक और सरल संस्करण प्रकाशित किए हैं। इनकी पुस्तकों में प्रयुक्त शुद्धता और प्रामाणिकता ने करोड़ों पाठकों का अटूट विश्वास जीता है, और इन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित गांधी शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
कन्हैयालाल मिश्र जी एक प्रख्यात लेखक, अनुवादक और संस्कृति मर्मज्ञ थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से प्राचीन भारतीय ग्रंथों को जनसामान्य तक पहुँचाने का स्तुत्य प्रयास किया। उनका जीवन सनातन धर्म के प्रसार और भारतीय मनीषा के संरक्षण को समर्पित रहा। उनकी कृतियों में भारतीय संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। 'योगिनी तन्त्र' जैसी दुर्लभ रचना का हिंदी अनुवाद करके उन्होंने तांत्रिक साहित्य प्रेमियों और साधना जगत पर एक चिरस्थायी उपकार किया है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
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