प्रतिष्ठित लेखक एवं रचनाकार
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gita press gorakhpur
4 रचनाएँगोविंदा दास विनीत
4 रचनाएँगीता प्रेस गोरखपुर
3 रचनाएँगीता प्रेस गोरखपुर विश्व की एक प्रतिष्ठित और अग्रणी धार्मिक संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष १९२३ में सनातन धर्म, संस्कृति और वेदों-पुराणों के प्रचार-प्रसार के लिए की गई थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य बिना किसी लाभ के कम कीमत पर धार्मिक पुस्तकों को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे समाज में नैतिक व आध्यात्मिक चेतना जागृत हो सके। अपनी स्थापना से लेकर अब तक, गीता प्रेस ने रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों के प्रामाणिक और सरल संस्करण प्रकाशित किए हैं। इनकी पुस्तकों में प्रयुक्त शुद्धता और प्रामाणिकता ने करोड़ों पाठकों का अटूट विश्वास जीता है, और इन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित गांधी शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गोस्वामी तुलसीदास
1 रचनाएँमुंशी देवीप्रसाद
1 रचनाएँजवाहरलाल नेहरू
1 रचनाएँधर्मवीर भारती
1 रचनाएँपंडित गोपेश कुमार ओझा
1 रचनाएँआचार्य विद्याधर शुक्ल
1 रचनाएँडॉ. प्रेरणा माथुर
1 रचनाएँडॉ भोलानाथ तिवारी
1 रचनाएँनारायणदत्त श्रीमाली
1 रचनाएँसुरेन्द्र वर्मा
1 रचनाएँडॉ. अनिल मोदी
1 रचनाएँज्योतिषाचार्य भृगुराज
1 रचनाएँहजारी प्रसाद द्विवेदी
1 रचनाएँS. Kierkegaard
1 रचनाएँसोरेन किर्केगाद (1813–1855) डेनमार्क के एक महान दार्शनिक, कवि और धर्मशास्त्री थे। उन्हें पश्चिमी अस्तित्ववाद के पिता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने संगठित धर्म, पाखंड और तत्कालीन दार्शनिक प्रणालियों की आलोचना करते हुए व्यक्तिगत विश्वास और आंतरिक सत्य पर विशेष बल दिया। उनके लेखन ने आधुनिक दर्शन और मनोविज्ञान को अत्यधिक प्रभावित किया। उनके जीवनकाल में उनकी रचनाओं को उतनी प्रसिद्धि नहीं मिली, किंतु मरणोपरांत उनके विचारों ने बीसवीं शताब्दी के दार्शनिक आंदोलनों को नई दिशा दी। 'द सिकनेस अनटो डेथ' और 'फियर एंड ट्रेमलिंग' जैसी उनकी कृतियाँ आज भी विश्व साहित्य में अद्वितीय स्थान रखती हैं।