पंचतंत्र की अमर कहानियां (Panchatantra Stories)
पंचतंत्र की अमर कहानियां (Panchatantra Stories) — अध्याय 1
शेर और चतुर खरगोश (The Lion and the Clever Rabbit)
फ़ॉन्ट:
एक वन में भासुरक नाम का एक बहुत बलशाली और क्रूर शेर रहता था। वह प्रतिदिन अपनी भूख से कहीं अधिक पशुओं का शिकार कर डालता था। वन के सभी जीव-जंतु उसके भय से थर-थर कांपते थे।
एक दिन वन के समस्त प्रमुख पशु एकत्रित हुए और उन्होंने शेर के पास जाकर विनम्र प्रार्थना की, "महाराज! आप वन के राजा हैं। इस प्रकार बिना कारण इतने जीवों को मारने से शीघ्र ही यह वन सूना हो जाएगा। हम आपके भोजन के लिए प्रतिदिन बारी-बारी से स्वयं एक पशु आपके पास भेज दिया करेंगे।"
शेर ने उनकी बात मान ली और कहा, "यदि किसी दिन कोई पशु समय पर नहीं आया, तो मैं सबको मार डालूंगा।"
कुछ दिनों बाद एक चतुर नन्हें खरगोश की बारी आई। खरगोश ने मन ही मन सोचा कि मृत्यु तो निश्चित है, क्यों न कोई उपाय करके इस दुष्ट शेर से पूरे वन को मुक्ति दिलाई जाए। वह जानबूझकर बहुत धीमे-धीमे चला और मार्ग में दोपहर तक घूमता रहा।
मार्ग में उसे एक गहरा कुआं दिखा। कुएं में झांकने पर उसे अपना ही प्रतिबिंब दिखाई दिया। खरगोश की आंखों में एक युक्ति चमक उठी।
वह संध्या समय भूखे और क्रोध से गरजते हुए शेर के पास पहुंचा। शेर ने क्रोधित होकर दहाड़ लगाई, "अरे छोटे जीव! एक तो तू इतना तुच्छ है और ऊपर से इतनी देर से आया है! मैं अभी तुझे मारकर पूरे वन के पशुओं का नाश कर दूंगा।"
खरगोश ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज! इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। हमारे साथ चार खरगोश और भेजे गए थे, परंतु मार्ग में एक अन्य बड़े शेर ने हमें रोक लिया और कहा कि वह इस वन का असली राजा है। मैं किसी प्रकार जान बचाकर आपको यह सूचना देने आया हूँ।"
भासुरक क्रोध से पागल हो उठा। उसने कहा, "मुझे तुरंत उस धृष्ट के पास ले चल! मैं अभी उसका अंत करता हूँ।"
खरगोश शेर को उसी गहरे कुएं के पास ले गया और बोला, "महाराज! वह दुष्ट इस भूमिगत दुर्ग में छिपा बैठा है।"
शेर ने कुएं में झांका। जल में उसे अपनी ही परछाईं दिखाई दी। उसने उसे ही दूसरा शेर समझकर जोर से गर्जना की। कुएं से गूंजती हुई अपनी ही दहाड़ सुनकर शेर और भड़क गया और उसने अपने शत्रु को समाप्त करने के लिए कुएं में छलांग लगा दी। कुएं के गहरे जल में डूबकर वह क्रूर शेर मर गया।
इस प्रकार चतुर खरगोश ने अपनी बुद्धि के बल पर स्वयं की और वन के समस्त प्राणियों की रक्षा की।
शिक्षा: बुद्धि बल से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है। संकट के समय घबराने के स्थान पर सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
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