Babarnama : Munshi Deviprasad | बाबरनामा : मुंशी देवीप्रसाद

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AuthorMunshi Deviprasad
GenreHistory
LanguageHindi
Pages460
File Size27
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Book Summary

“बाबरनामा” मुंशी देवीप्रसाद द्वारा प्रस्तुत एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो मुगल सम्राट बाबर की आत्मकथा और भारत में उनके अनुभवों का सजीव विवरण देता है। इस पुस्तक में बाबर के जीवन, संघर्ष, राजनीति, सैन्य अभियानों और भारत की सांस्कृतिक विविधता का रोचक वर्णन मिलता है।

यह किताब न केवल इतिहास प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है, बल्कि सामान्य पाठकों को भी उस युग की घटनाओं, जीवनशैली और जीवन मूल्यों से परिचित कराती है। मुंशी देवीप्रसाद की भाषा सरल, स्पष्ट और पाठक को जोड़ने वाली है, जिससे इतिहास के गूढ़ पक्ष भी आसानी से समझे जा सकते हैं।

“बाबरनामा” का उद्देश्य भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को उजागर करना और पाठकों को एक प्रामाणिक और समृद्ध दृष्टिकोण देना है। सटीक तथ्यों, रोचक प्रसंगों और गहन विश्लेषण के साथ यह पुस्तक अध्ययन, शोध और रुचिपूर्ण पाठन के लिए आदर्श है।

Additional Information

सुगली कागज़ हिन्दुस्तान में बाबर के समय से बनाया जाने लगा। उसके बाद हुमायूं, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब—ये छह बड़े बादशाह इसी वंश में हुए, जिनके काल में दिनोदिन राज्य की वृद्धि होती गई।

इनमें से अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के राज्य-काल का इतिहास तो हम पहले ही प्रकाशित कर चुके हैं। बाबर का यह ग्रन्थ अब रूपायित होकर प्रस्तुत है और औरंगज़ेब का भी छप रहा है। हुमायूँ का इतिहास अभी प्रकाशित नहीं हुआ—यद्यपि लिख लिया गया है—और शीघ्र ही वह भी छपने वाला है।

इस प्रकार कई वर्षों के परिश्रम से तैमूरी–मुग़ल वंश (युगल बंश) के पुरखों और बादशाहों का इतिहास हिन्दी साहित्य के साधकों की सेवा में अर्पित किया जाता है। आशा है कि विद्वानों के पसंद आने पर आगे भी हमारा साहस इस विषय में और बढ़ेगा।


बाबर का इतिहास

बाबर का यह इतिहास तुज़ुक-ए-बाबरी से लिखा गया है, जो उनका स्वयं-लिखित रोज़नामचा (डायरी) है। जहाँ आवश्यकता पड़ी, अन्य इतिहास-ग्रन्थों से टीका-टिप्पणी की गई है। मूल में जहाँ कहीं कुछ विवरण छूट गया था, वहाँ हबीबुल-सियर, तवारीख़-ए-फ़रिश्ता आदि प्रामाणिक ग्रन्थों से पूरा किया गया है।


हिजरी व तिथि-पद्धति का समन्वय

हिजरी साल और तारीखों के साथ-साथ हिन्दी तिथि, मास और संवत् भी हमने अपनी ऐतिहासिक जंत्री से अंकित कर दिए हैं। यह जंत्री अत्यन्त उपयोगी है; जब यह प्रकाशित होगी, तब हिजरी, अंग्रेज़ी और हिन्दी—तीनों तिथि-पद्धतियों में महीनों और वर्षों के मिलान में इतिहास-प्रेमियों को बहुत सुविधा प्राप्त होगी।

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