EDITION & METADATA (ग्रंथ विवरण)
- Language (भाषा)
- Sanskrit
- Category (श्रेणी)
- स्वास्थ्य
- Genre (विधा)
- आयुर्वेद
- Total Pages (कुल पृष्ठ)
- 50
- Digital File Size (फ़ाइल साइज़)
- 101 MB (PDF)
- Author (लेखक / रचयिता)
- Acharya Gautam
- Archive Reference
- AsliKokaShastra
- Rights & Access (अधिकार)
- Public Domain Heritage
यह पुस्तक संस्थागत डिजिटल आर्काइव में संरक्षित है।
Access at Primary SourceAbout the Book (पुस्तक परिचय)
आचार्य गौतम द्वारा रचित 'असली कोका शास्त्र' प्राचीन भारतीय कामशास्त्र, आयुर्वेद और दुर्लभ वनौषधियों के चमत्कारी प्रयोगों का एक अनूठा संग्रह है। यह ग्रंथ प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भधारण उपायों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर प्रकाश डालता है।
इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक और सुगम दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुँचाना है। इसमें वर्णित योग और उपाय केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि वे लोक-कल्याण और व्यावहारिक जीवन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर संकलित किए गए हैं। प्राचीन काल से चली आ रही आचार्य परंपरा के माध्यम से यह पुस्तक स्वास्थ्य, प्रजनन विज्ञान और घरेलू औषधीय प्रयोगों के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जो आधुनिक शोधकर्ताओं और आयुर्वेद प्रेमियों के लिए अत्यंत उपादेय है।
'हिंदी पीडीएफ लाइब्रेरी' के डिजिटल संरक्षण अभियान के तहत इस दुर्लभ ग्रंथ को सहेजा गया है ताकि शोधार्थी और जिज्ञासु पाठक इस प्राचीन विद्या का लाभ उठा सकें। इसमें दी गई विषय-सूची और प्राचीन आख्यान इस बात के साक्षी हैं कि हमारे पूर्वज प्रकृति और चिकित्सा विज्ञान के कितने गहरे ज्ञाता थे। यह डिजिटल संस्करण न केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की थाती को आधुनिक पाठकों की पहुँच में भी लाता है।
पुस्तक की मूल भूमिका / प्रस्तावना व प्रमुख अंश
r > 11.09.00 ^ 141 kokaapandit kaa sankshipt jeevan ` _ = ` (r dasht dono १२ naheen pada़ee . tat par pachate hee ghanh de vyakti ek 1 paas dikhaayee ti, r sharaan ne sukakar bhanaam kiyaa . mantree " ¶ uny saay viyaa .
kahaa. -aapate inakee chintaa ke kaaran se avashy dee avagat dani ! mantree ne kahaa, magavan, aaj ek daray dekhakar ekaae? inakee res daalat ho gayee 1 yadyapi satr se kahane yogy vah baat naheen hai, kintu aap jase mahaatmaaon se dipaanaa bhee vyath h „yake baad mantree ne mahaaraaj kee alumatti lekar chintit haane kaaran kah sunaayaa . jise ghulakar mahaatmaa ne kahaa, aapi (chintaa n kare, idhar chaahe taa aapako abhilaashaa poone haagaa itanaa kahakar mahaaraa un darnokaasmathale apano kgato kaan r chal diye . unakee katiyaa kareeb tee thee . jantu pet karee oochaaee-neechaaee ke kaaran unde patane me karo aaghaa ghantaa lagaa . tee me pchakar in danaan kaa ek kushaasan par bethaa diyaa or aap vaheen se chale gaye . thodee der baad ekalambee lataa liy hae jaa pe or use mahaaraaj ke saamane rakhakar bole,--is vana-lataame १५ goth he . har ek goth ke upar srit se kasakar baandh d . ek gadh kinsee batten man rakhakar kaat lojiyangaa . isame se saphed doosh ke samaan ras nikalegaa . usakraa chaakha-pid chanaa lenaa . ye seaama- lataa naas kee bhrasiddh lataa he. ise sevan se avashy santaan | "praapt haatee nai . | ५ | ५६५ . 0 4२. | ra: ५, | kakh dinaa ke baad ishvar ko kripaase mahaaraaj or santr deno # ॐ ghar sen putr utpann hae . mahaaraaj ne apane putr kaa naam shambhu-
sih rakkhaa or mantree pa॑० deenanaath jo ne ape putrakaanaam kaamanaath prasiddh kiyaa . vadabe anubhavee vidvaan pandito dvaaraa chaalakon kee partaa karaayee gayaa . vaalakan kee mukhaakrati dakhakar khabhaan ekasvar se unakaa m vishy sukhamay vatalaay | ramanaa jabar bolane laayak chhaa, tatr usakee kokil samaan "dur aavaaj ke sunakar usake pitaa use "kokaah ktakar pukaarane lage . is naam ॐ aage kaamanaath naam chip gayaa or ve bade
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र > 11.09.00 ^ 141 कोकापंडित का संक्षिप्त जीवन ` _ = ` (र दष्ट दोनो १२ नहीं पड़ी । तट पर पचते ही घन्ह् दे व्यक्ति एक 1 पास दिखायी ति, र शरान ने सुककर भणाम किया । मन्त्री " ¶ उञ साय विया ।
कहा. -आपते इनकी चिन्ता के कारण से अवश्य दी अवगत दणि ! मन्त्री ने कहा, मगवन्, आज एक दरय देखकर एकाए? इनकी रेस दालत हो गयी 1 यद्यपि सत्र से कहने योग्य वह् बात नहीं है, किन्तु आप जसे महाट्माओं से दिपाना भी व्यथ ह „यके बाद मन्त्री ने महाराज की अलुमत्ति लेकर चिन्तित हाने कारण कह सुनाया । जिसे घुलकर महात्मा ने कहा, आपि (चिन्ता न करे, इधर चाहे ता आपको अभिलाषा पूणे हागा इतना कहकर महारा उन दर्नोकास्मथले अपनो क्गटो कां र् चल दिये । उनकी कटिया करीब टी थी । जन्तु पेत करी ऊचाई-नीचाई के कारण उन्दे पटने मे करो आघा घण्टा लगा । टी मे प्चकर इन दनां का एक कुशासन पर बेठा दिया ओर आप वहीँ से चले गये । थोडी देर बाद् एकलम्बी लता लिय हए जा पे ओर उसे महाराज के सामने रखकर बोले,--इस वन-लतामे १५ गोठ हे । हर एक गोठ के उपर सृत से कसकर बांध द् । एक गढ किंसी बत्तेन मं रखकर काट लोजियंगा । इसमे से सफेद दूष के समान रस निकलेगा । उसक्रा चाख-पिड चना लेना । ये सेाम- लता नास की भ्रसिद्ध लता हे। इसे सेवन से अवश्य संतान | "प्राप्त हाती नै । | ५ | ५६५ ॥ 0 4२. | र: ५, | कख दिना के बाद इश्वर को कृपासे महाराज ओर सन्त्र देनो # ॐ घर सें पुत्र उत्पन्न हए । महाराज ने अपने पुत्र का नाम शम्भु-
सिह रक्खा ओर मंत्री प॑० दीननाथ जो ने अपे पुत्रकानाम कामनाथ प्रसिद्ध किया । वडबे अनुभवी विद्वान् पंडितो द्वारा चालकों की पर्ता करायी गया । वालकं की मुखाक्रति दखकर खभान एकस्वर से उनका म विष्य सुखमय वतलाय | रमना जबर बोलने लायक छा, तत्र उसकी कोकिल समान "दुर आवाज के सुनकर उसके पिता उसे "कोकाः क्टकर पुकारने लगे । इस नाम ॐ आगे कामनाथ नाम चिप गया ओर वे बडे
महाराज ने म॑त्रीजी से कहा, मन्त्रीजी, अव हमलेागों की इच्छा परमार ने पूणे कर दी । अव हमे राज-पाट का मार् लङ को = सोप देना चाहिये । मेरी सम मं अव॒ लङ्के पूण योग्य ह गये दै । रोड़ी देर के बाद केकापंडित की बुद्धि को परात्ता के लिये उने सम्बोधन कर महाराज ने कहा, जितना प्रेम संतान के भ्रति माता-पिता क दाता है, उदना संतान के मातापिता के भ्रति होता दैया नही! | काक्रा पंडित ने उठकर वड़ो नस्तः के साथ कहा,- राजन्, यहं ्ररन जितना कठिन है, उतना द महत्वपूण भी है । मँ इसका उत्तर अपनी स्वस्पचुद्ध चसा देवा ह । संभव है कोड नटि हा ता उसे महाराज चसा करगे । क्का दनं मे निःस्वाथै-प्ेम बरावर दी हेता दे, चिन्त स्वाथमय-प्रेम में अवश्य अन्तर देता दह) सहाराजने का,--क्या कोड दृष्टान्त देकर खमा सक्ते ¶ केका पडत ने कदा, दां हतिहास मे एसे बहुत से उदा- हरण आये दै । जसे दिरण्यक्यप ने प्हयाद् को कितने कष्ट दिये ? सि फं इस लिये कि वह् देरवर क स्थान पर उसी के नाम. की भाला फेरे । दसय उदाहरण है अजुन का । जिसने अपनी सेना = रता ॐ लिये अपने वृदे पितामह भीष्म जी क प्राण् उन्हीं से
Kathanak va Saahityik Saaraansh (Summary in Hinglish)
Literary Summary & Synopsis
कथानक व साहित्यिक सारांश (Summary)
ग्रन्थस्य संक्षेपः (Sanskrit Summary)
यह पुस्तक क्यों पढ़ें? (Why Read)
यह पुस्तक उन सभी शोधकर्ताओं, छात्रों और पाठकों के लिए पठनीय है जो प्राचीन भारतीय कामशास्त्र, आयुर्वेद और वनौषधि विज्ञान के रहस्यों को गहराई से समझना चाहते हैं। हिंदी पीडीएफ लाइब्रेरी पर इसका डिजिटल संस्करण उपलब्ध होने से यह दुर्लभ ज्ञान अब हर जिज्ञासु के लिए सुलभ हो गया है।
इस पुस्तक में क्या मिलेगा? (What You Will Find in This Book)
इस ग्रंथ के प्रमुख विषय, महत्वपूर्ण अध्याय एवं शैक्षणिक संदर्भ
पुस्तक के आंतरिक पृष्ठ (Preview Pages)
आचार्य गौतम एक प्रतिष्ठित प्राच्य विद्या विशारद, आयुर्वेद मर्मज्ञ एवं पारंपरिक भारतीय साहित्यों के निष्णात संकलक रहे हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्राचीन भार...
सार्वजनिक डिजिटल धरोहर संग्रह
यह पुस्तक सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संरक्षण हेतु सार्वजनिक पुस्तकालय में संकलित की गई है।
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Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
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