Mahabharata Volume 4
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Mahabharata Volume 4

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50 पृष्ठ
महाभारत का यह चौथा खंड युद्ध के उपरांत के मर्मस्पर्शी और शोकाकुल दृश्यों, अश्वत्थामा के कृत्यों, तथा धृतराष्ट्र के विलाप के माध्यम से जीवन की अनित्यता और कर्म के अटल सिद्धांतों का गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।

EDITION & METADATA (ग्रंथ विवरण)

Language (भाषा)
Hindi
Total Pages (कुल पृष्ठ)
50
Digital File Size (फ़ाइल साइज़)
14.49 MB (PDF)
Author (लेखक / रचयिता)
गीता प्रेस गोरखपुर
Archive Reference
mahabharata-volume-4
Rights & Access (अधिकार)
Public Domain Heritage

यह पुस्तक संस्थागत डिजिटल आर्काइव में संरक्षित है।

Access at Primary Source

About the Book (पुस्तक परिचय)

महाभारत का यह चौथा खंड युद्ध के उपरांत के मर्मस्पर्शी और शोकाकुल दृश्यों, अश्वत्थामा के कृत्यों, तथा धृतराष्ट्र के विलाप के माध्यम से जीवन की अनित्यता और कर्म के अटल सिद्धांतों का गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।

महाभारत का चौथा खंड सनातन साहित्य के इतिहास में अत्यंत मर्मस्पर्शी और नाटकीय मोड़ों को समेटे हुए है, जिसे गीताप्रेस गोरखपुर ने अपनी गौरवशाली परंपरा के अनुरूप अत्यंत प्रामाणिक और शुचितापूर्ण ढंग से प्रकाशित किया है। इस ग्रंथ में कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध के उपरांत की परिस्थितियों, विशेषकर अश्वत्थामा द्वारा रात्रि में किए गए सोते हुए वीरों के संहार और तदुपरान्त उत्पन्न शोक-संतप्त वातावरण का सजीव चित्रण मिलता है। गीता प्रेस का यह संस्करण पाठकों को महर्षि वेदव्यास की उस अमर गाथा से जोड़ता है जहाँ विजय का उल्लास भी विषाद और आंसुओं में डूब जाता है।

इस खंड के मूल दार्शनिक और साहित्यिक विषयों में जीवन की नश्वरता, कर्मों के अटल विधान और परमेश्वर के विधान के आगे मानवीय विवशता का अत्यंत गहरा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। अश्वत्थामा का अपनी मणि देकर पाण्डवों के गर्भ पर प्रहार करना, श्रीकृष्ण से शाप पाकर वन की ओर प्रस्थान करना तथा धृतराष्ट्र का पुत्रशोक में विलाप करना—यह सब मानव जीवन के उन अंधकारमय पक्षों को उजागर करता है जहाँ अज्ञान और अहंकार अंततः विनाश का कारण बनते हैं। संजय द्वारा धृतराष्ट्र को दिया गया सांत्वना संदेश और शरीर की अनित्यता का बोध वेदांत दर्शन के उन शाश्वत सत्यों को रेखांकित करता है जो हर युग में प्रासंगिक हैं।

आज के भौतिकवादी और तनावपूर्ण युग में इस ग्रंथ का अध्ययन पाठकों को आंतरिक शांति, मानसिक स्थिरता और आत्ममंथन की दृष्टि से अमूल्य व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार अत्यधिक मोह और शोक मनुष्य की बुद्धि को आच्छादित कर लेते हैं और उनसे उबरने का मार्ग केवल आध्यात्मिक ज्ञान एवं समर्पण से ही संभव है। 'हिंदी पीडीएफ लाइब्रेरी' (hindipdflibrary.com) के माध्यम से इस दुर्लभ और पावन ग्रंथ को डिजिटल प्रारूप में सहेजने का हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि भारत की इस महान साहित्यिक और आध्यात्मिक थाती को घर-घर तक पहुँचाया जा सके, ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर नैतिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बन सके।
सम्पूर्ण विवरण • प्रामाणिक संदर्भ हिन्दी पीडीएफ लाइब्रेरी
ॐ

पुस्तक की मूल भूमिका / प्रस्तावना व प्रमुख अंश

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Surrender to Lord Shiva and kill all the warriors who were sleeping at night, Panchal etc., by the help of Ashwatthama [Kritvarma of the warriors running away from the tank and

Adhvatthamaka gave his gem and gave birth to Pandavas, after receiving a curse from Shri Krishna, Ashvatthamaka left for the forest.

$- Dhritrashtra's lamentation of the nation and Sanjay's consoling him convince Dhutrashtra to give up his grief.

Rajika explains the impermanence of the body and tells Dhritarashtra to stop mourning, a solution to get rid of it.

Getting out of town Hub Tarashtra's Kripacharya,_The gift and Kripacharya of Ashwatthama and Kritavarma. reporting the destruction of an army

Nala meeting Dhutarashtra: On breaking the iron statue of Bhima by Dhritarashtra, “Three gallnas were given to him”
समर्पण करके भगवान शिवसे : करना अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए_पांचाल आदि_ समस्त वीरोंका संहार हार [टकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और

अध्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भापर दिव्य १६- श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान

$- धृतराष्ट्रका राष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना धूतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके

रजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना छूटनेका उपाय

नगरसे बाहर निकलना | हब तराष्ट्रसे कृपाचार्य,_अश्वत्थामा और कृतवर्माकी भेंट और कृपाचार्यक | सेनाके विनाशकी सूचना देना

नल धूतराष्ट्रसे मिलन: , धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग करनेपर “ थ्री गल्‍ल्णा उन्हें ह

Kathanak va Saahityik Saaraansh (Summary in Hinglish)

mahaabhaarat kaa yah chauthaa khand yuddh ke uparaant ke marmasparshee aur shokaakul drishyon, ashvatthaamaa ke krityon, tathaa dhritaraashtr ke vilaap ke maadhyam se jeevan kee anityataa aur karm ke atal siddhaanton kaa gahan aadhyaatmik jnyaan pradaan karataa hai.

Literary Summary & Synopsis

महाभारत का यह चौथा खंड युद्ध के उपरांत के मर्मस्पर्शी और शोकाकुल दृश्यों, अश्वत्थामा के कृत्यों, तथा धृतराष्ट्र के विलाप के माध्यम से जीवन की अनित्यता और कर्म के अटल सिद्धांतों का गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।

कथानक व साहित्यिक सारांश (Summary)

महाभारत का यह चौथा खंड युद्ध के उपरांत के मर्मस्पर्शी और शोकाकुल दृश्यों, अश्वत्थामा के कृत्यों, तथा धृतराष्ट्र के विलाप के माध्यम से जीवन की अनित्यता और कर्म के अटल सिद्धांतों का गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।
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Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Mahabharata Volume 4 पुस्तक, इसके अध्ययन, पीडीएफ प्रारूप और संदर्भ से संबंधित मुख्य सवाल-जवाब।

Mahabharata Volume 4 is a monumental Hindi (हिन्दी) book comprising 50 pages that covers गीताप्रेस या गीता मुद्रणालय, विश्व की सर्वाधिक हिन्दू धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के गीता प्रेस रोड क्षेत्र में स्थित एक भव.... It has been digitally preserved to offer authentic open access to cultural and educational heritage.
This edition is attributed to and compiled by गीता प्रेस गोरखपुर.
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The primary text is presented in Hindi (हिन्दी), complemented by phonetic Hinglish and English excerpts to support bilingual readers and international researchers.
Yes, this digital edition has been archived and indexed from open educational archives (such as the Internet Archive and Public Library of India) for non-commercial digital preservation and educational reference.