तेनालीराम की चतुराई (Tenalirama Stories)
तेनालीराम की चतुराई (Tenalirama Stories) — अध्याय 1
तेनालीराम और दो चोर (Tenalirama and Two Thieves)
फ़ॉन्ट:
एक समय की बात है, विजयनगर में चोरों का बड़ा उपद्रव था। एक रात तेनालीराम को अपने घर के पिछवाड़े बगीचे की झाड़ियों में दो चोरों के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी। तेनालीराम तुरंत समझ गए कि आज चोर उनके घर में सेंध लगाने आए हैं।
तेनालीराम चुपचाप भीतर गए और अपनी पत्नी से ऊंची आवाज में बोले, "सुनती हो! आजकल नगर में बहुत चोरियां हो रही हैं। इसलिए हमारे जितने भी सोने-चांदी के गहने और हीरे-जवाहरात हैं, उन्हें इस भारी लोहे के संदूक में भरकर बगीचे के कुएं में छिपा देते हैं, ताकि कोई चोर उन्हें पा न सके।"
झाड़ियों में छिपे चोरों ने यह सुना तो मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। कुछ ही देर में तेनालीराम और उनकी पत्नी ने भारी पत्थरों से भरा एक भारी बक्सा उठाया और ले जाकर कुएं में धड़ाम से फेंक दिया। इसके बाद वे दोनों भीतर जाकर आराम से सो गए।
चोरों ने सोचा कि कुएं में पानी अधिक है, पहले पानी निकालना पड़ेगा तभी संदूक निकाला जा सकेगा। दोनों चोर रात भर बाल्टियों से कुएं से पानी निकाल-निकाल कर क्यारियों में डालते रहे।
सुबह होते-होते चोर थककर चूर हो गए और पूरा बगीचा पानी से सींच उठा। तभी तेनालीराम हाथ में छड़ी लिए मुस्कुराते हुए बगीचे में आए और बोले, "भाइयों! मेरे पूरे बगीचे को मुफ्त में पानी देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! अब थोड़ा विश्राम कर लो, सिपाही तुम्हें लेने आ रहे हैं।"
चोर समझ गए कि तेनालीराम ने उन्हें मूर्ख बनाकर बगीचे की सिंचाई करवा ली। वे जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए।
शिक्षा: संकट के समय घबराने के स्थान पर ठंडे दिमाग और बुद्धिमत्ता से काम लेने पर बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है।
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