Vrihud Hastrekha Shastra : Narayan Dutt Shrimali | वृहद् हस्तरेखा शास्त्र : नारायणदत्त श्रीमाली

0
107
Vrihud Hastrekha Shastra Narayan Dutt Shrimali
AuthorNarayan Dutt Shrimali
GenreAstrology Books
LanguageHindi
Pages350
File Size10
Click to rate this post!
[Total: 1 Average: 5]

Book Summary

“वृहद् हस्तरेखा शास्त्र” नारायणदत्त श्रीमाली द्वारा लिखित एक उत्कृष्ट पुस्तक है, जो हस्तरेखा विज्ञान के हर पहलू को सरल और वैज्ञानिक भाषा में प्रस्तुत करती है। इस किताब में आपको हाथ की रेखाओं का गहरा विश्लेषण, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भूमिका, और भविष्य जानने की तकनीकें विस्तार से समझाई गई हैं।

यह पुस्तक उन सभी के लिए आदर्श है, जो अपने भविष्य, व्यक्तित्व और जीवन की दिशा के बारे में जानना चाहते हैं। इसमें हस्तरेखा के साथ संबंधित योग, जीवन के उतार-चढ़ाव, सफलता और संभावनाओं के बारे में सरल उदाहरण और व्यावहारिक सलाह दी गई है।

पाठकों को इस किताब से हस्तरेखा शास्त्र का गहन और सटीक ज्ञान मिलता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। नारायणदत्त श्रीमाली की विशेषज्ञता और अनुभव लेखन को और भी विश्वसनीय बनाते हैं, जिससे यह पुस्तक पढ़ने योग्य और विश्वास निर्माण में सहायक साबित होती है।

Additional Information

कराग्रे वसते लक्ष्मी कर मध्ये सरस्वती ।
कर पृष्ठे स्थितोब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम् ।।
ये दो पंक्तियां ही हाथ का महत्त्व सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं, हमारा हाथ एक सामान्य हाथ ही नहीं है, अपितु धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टि से इसमें सभी देवताओं का निवास है, भौतिक दृष्टि से मानव की ओजस्विता और कार्य-शक्ति का पुंज है और ज्योतिष की दृष्टि से सम्पूर्ण जीवन की हलचल का स्रोत है। हमारा जीवन वेगमय है, निरन्तर सक्रिय है, और पल-पल परिवर्तनशील है, और इस सारे परिवर्तन के घात-प्रतिघातों का यह सम्पूर्ण रूप से जानकर विश्वास करते हैं, बर्तमान को उसके अनुसार अपने-थाप को ढालने का का, जीवन के संघर्षों का, तथा मानव प्रतिबिम्ब है, जिसके माध्यम से भूत को समझते हैं और भविष्य को पहचान कर प्रयत्न करते हैं जिसकी वजह से हम स्थिर वेगमय रह सकें। जोरों का तूफ़ान चल रहा है और हमें इस तूफ़ान में ही कदम बढ़ाने हैं, परन्तु यदि तूफ़ान-धांधी सामने आ रही है, तो हमें एक-एक पग उठाने में तकलीफ़ होगी, पर यदि तूफ़ान पीठ की ओर से आ रहा है, तो हमें वह तूफ़ान सहायता देगा, हमारे पैर आसानी से उठेंगे, हम सुविधा से गतिशील होकर सुगमतापूर्वक अपने गन्तव्य स्थल तक पहुंच सकेंगे ।
इस संसार में भी निरन्तर घात-प्रतिघात, संघर्ष-कशमकश का तूफ़ान चल रहा है, और हमें इस तूफ़ान में ही अपनी मंजिल तक पहुंचना है। हस्तरेखा शास्त्र यह जानकारी देने के लिए आपका सहायक हो सकता है कि तूफ़ान का वेग किस ओर से है ? आप कौन सा रास्ता चुनें, जिससे तूफ़ान झाप की पीठ की ओर से बहे भौर आप सुविधापूर्वक अपने गन्तव्य स्थल तक पहुँच सकें ।
हमारे सम्पूर्ण जीवन की छोटी से छोटी घटना हथेली में अंकित है, हथेली पर पाई जाने वाली सूक्ष्म से सूक्ष्म रेखा का भी अपने-आप में महत्त्व है। कोई भी रेखा व्यर्थ नहीं है, किसी भी रेखा का अस्तित्व निरर्थक नहीं है, आवश्यकता है ऐसे हस्तरेखा-शास्त्री की, जो इन रेखाओं को पढ सके, छोटी से छोटी रेखा के महत्त्व को समझ सके और उसे स्पष्ट कर सके ।
वस्तुतः भविष्य-कथन हमारे युग की सर्वोच्च उपलब्धि है, क्योंकि जितना संघर्ष भाज के युग में है, उतना पहले कभी नहीं रहा, और हस्तरेखा विज्ञान ने जितनी प्रगति इस युग में की है, उतनी पहले कभी नहीं हुई। अमेरिका, यूरोप, फ्रांस, जापान श्रादि उन्नत देशों में इससे संबंधित वैज्ञानिक परीक्षण हुए हैं तथा वहां के विश्व विद्यालयों में इस विज्ञान को प्राथमिकता दी जाने लगी है। चिकित्सा क्षेत्र, तथा भविष्य-कथन के क्षेत्र में तो इसकी उपयोगिता निर्विवाद है।
इस कशमकश के युग में हम इस विज्ञान के माध्यम से अपने भावी जीवन को समझ सकते हैं, आने वाले समय के संघर्षों से परिचित हो सकते हैं, और उनको ध्यान में रखते हुए हुम भाबी जीवन की योजना बना सकते हैं। उसके अनुसार अपने-आप (4)
को व्यवस्थित कर सकते हैं, तथा संघर्षों, खतरों, घात-प्रतिघातों से अपने-आप को बचाते हुए जल्दी से जल्दी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं, वांछित कार्य को सम्पन्न कर अपने व्यक्तित्व का विस्तार कर सकते हैं।
आज सारे विश्व की आँखें इससे संबंधित ज्ञान के लिए भारत की ओर लगी हैं, और इस समय में भारत का यह कर्तव्य है कि वह आगे बढ़कर इस क्षेत्र में नेतृत्व करे, विश्व को दिशा निर्देश दे और नवीनतम सूत्रों से परिचित कराए ।
काफी समय से इस बात की आवश्यकता अनुभव की जा रही थी कि सामुद्रिक शास्त्र पर एक ऐसा सांगोपांग ग्रन्थ लिखा जाये, जिसमें हस्तरेखा से संबंधित सभी अंगों-उपांगों का सचित्र विवरण वर्णन हो तथा सरलतम भाषा में उच्चतम ज्ञान दिया जा सके। मुझे विश्वास है कि यह ग्रंथ इस उद्देश्य की पूति में सहायक हो सकेगा ।
इस ग्रन्थ में मैंने भारतीय एवं पाश्चात्य सामुद्रिक ग्रंथों का निचोड़ दिया है. साथ ही यह भी बताया है कि दोनों पद्धतियों में मूलतः क्या अन्तर है ? यह अन्तर क्यों है ? सही पद्धति कौन-सी है ? तथा किन सूत्रों के माध्यम से सही-सही भविष्य-कथन किया जा सकता है ?
इस पुस्तक में पहली बार इन तथ्यों का समावेश हुआ है, साथ ही हाथ की रेखाबों के बारे में, उंगलियों व उनके जोड़ों के बारे में, तथा मानव के अन्य चिह्नों के बारे में विस्तार से विवरण संगृहीत हुआ है, इन सबके पीछे है, मेरा अध्ययन, अध्ययन से भी बढ़ कर है विषय प्रतिपादन और विषय प्रतिपादन से भी बढ़कर है मेरा इस क्षेत्र में वर्षों का अनुभव ।
भारत ही नहीं, विश्व के सामुद्रिक ग्रन्थों में भी ज्योतिष योगों का पूर्ण विवरण-वर्णन नहीं है, क्योंकि यह विषय दुरूह है, दुर्गम है, अप्राप्य है। इस पुस्तक में पहली बार दो सौ चालीस से भी अधिक हस्तरेखा योगों का सांगोपांग अध्ययन स्पष्ट हुआ है, यह इस पुस्तक की विशेषता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here